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"काम निकलते ही गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं, जाट समाज से मांफी मांगें", मायावती ने अखिलेश पर साधा निशाना

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Aug 22, 2026 10:26 am IST,  Updated : Aug 22, 2026 12:14 pm IST

बसपा सुप्रीमो ने जयंत चौधरी को लेकर अखिलेश यादव के बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताया। अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के बारे में कहा था उन्होंने कहा कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’।

Mayawati- India TV Hindi
मायावती Image Source : PTI

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। समाजवादी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के बारे में की गई टिप्पणियों ने बसपा प्रमुख मायावती को भी बेहद आहत कर दिया है। उन्होंने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी के बारे में कहा था कि  ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’। 

जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए

मायावती ने सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक कई ट्वीट किए और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान को अमर्यादित, अशोभनीय और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी के लिए अखिलेश यादव को न सिर्फ संबंधित पार्टी और उसके नेता, बल्कि चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज से भी माफी मांगनी चाहिए।

मायावती ने सपा के राजनीतिक इतिहास और गठबंधन की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी का रवैया अपने विरोधियों के साथ ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों के प्रति भी संकीर्ण और अविश्वसनीय रहा है। उन्होंने कहा कि सपा के इसी स्वभाव के कारण गठबंधन लंबे समय तक नहीं टिक पाए। जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।

अति-अहंकार के चलते टूटा था गठबंधन

मायावती ने आगे लिखा-इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ। फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ वाली पार्टी बी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है। 

गठबंधन के मामले में स्वार्थी है सपा

मायावती ने सपा पर गठबंधन के मामले में भी स्वार्थी होने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि सप गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है। मायावती ने कि इस तरह की हरकत यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।

मायावती ने आगे कहा कि यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं। 

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